धनी हो या गरीब
उच्च हो या नीच
राजा हो या रंक
मशहूर हो या बेनाम
है कोई ऐसा जिसने जग में
ना खाया हो दुःख के डंक !
इस संसार के लोग
यह माना करते हैं
काटती है बहुत गरीबी
जब कि पैसेवाले लोग
मौज- मस्ती में जीते हैं
बटोरकर सारी खुशनसीबी !
यह सच लगता है जौभी
इन भौतिक आँखों को
इस दुनिया में सब ओर
दौलत भी लेकर आती है
मालिकों के लिए अपने
दुखों के सौगात घोर !
इसीलिए ऋषि महात्मा ने
उच्चारे हैं वचन स्वर्गिक
ज्ञान-अम्बर में जो सुहाय
साईं उतना ही दीजिए मुझे
समाय जामें मैं और मेरे
और साधु भी न भूखा जाय।
और साधु भी न भूखा जाय।
Xavier Bage
Thurs, June 04 , 2016

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