Saturday, 4 June 2016

साईं उतना ही दीजिए
























धनी हो या गरीब 
उच्च हो या नीच 
राजा हो या रंक 
मशहूर हो या  बेनाम 
है कोई ऐसा जिसने जग में 
ना खाया हो दुःख के डंक !

इस संसार के लोग 
यह माना करते हैं 
काटती है बहुत गरीबी 
जब कि पैसेवाले लोग 
मौज- मस्ती  में जीते हैं 
बटोरकर सारी खुशनसीबी !

यह सच लगता है जौभी 
इन भौतिक आँखों को  
इस दुनिया में सब ओर 
दौलत भी लेकर आती है 
मालिकों के लिए अपने
दुखों के सौगात घोर !

इसीलिए ऋषि महात्मा ने 
उच्चारे हैं वचन स्वर्गिक 
ज्ञान-अम्बर में जो सुहाय
साईं उतना ही दीजिए मुझे
समाय जामें मैं और मेरे
और साधु भी न भूखा जाय।


Xavier Bage
Thurs, June 04 , 2016

No comments:

Post a Comment