Wednesday, 13 July 2016

वो पगली





















वो पगली बेचारी 
रास्तों पर भटकती हुई 
वो किस्मत  की मारी !

कोई तो शौक से पागल नहीं होता 
पागलपन के पीछे जरूर 
होगी कोई कहानी
जरूर रही होगी  वो 
प्यार करने वाले माँ-बाप की 
गुड़िया बिटिया रानी 

ममतामय हाथों से खानेवाली 
आज चाट रही है जूठन -थारी !              


बस स्टॉप शेड के पीछे 
दुबककर बच जाती है
प्लास्टिक से लिपटकर मौसम की मार 
लेकिन उन कुत्तों से कैसे बचे 
जो किया करते हैं 
नारी-देह का शिकार ?

लज्जा होती है अपने आप पर , आदमी पर 
जो कसमसाता नहीं देख अन्याय भारी !

Xavier Bage
Thurs, 14 July 2016                               



No comments:

Post a Comment